Tuesday, 09 August 2022

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वायु प्रदूषण के मामले में महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर।

वायु प्रदूषण के मामले में महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर।

SOURCE BY : POST REPORTS

राज्य स्तरीय चयन में हुआ खुलासा पहले नंबर पर यूपी दूसरे पर बिहार तीसरे पर महाराष्ट्र।


वायु प्रदूषण के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है जहां भारत दूसरे नंबर पर है वही राज्य में महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर है । यह खुलासा हाल ही में विश्वबैंक द्वारा जारी किए गए वायु प्रदूषण और गरीबी के सर्वे रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र की 97 फ़ीसदी आबादी सबसे घातक प्रदूषक कण पीएम 2.5 से प्रभावित है । यह प्रदूषक कण ईंधन के ज्यादा इस्तेमाल से हवा में फैलता है।

विश्व बैंक ने 211 देशों और राज्यों (प्रदेशों) में वायु प्रदूषण और गरीबी को लेकर हाल ही में एक अध्ययन किया था अध्ययनकर्ताओं ने अध्ययन में सबसे घातक प्रदूषक कण 2.5 पर अपना ध्यान केंद्रित किया था ।इस अध्ययन में एशियाई देश वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित पाए गए है। इसके तहत सबसे अधिक आबादी वाला देश भारत दूसरे नंबर पर है इस सूची पर तीसरे नंबर पर यूएस और चौथे पर इंडोनेशिया है । पीएम 2.5 प्रदूषक कण से सबसे अधिक 97 फीसदी आबादी प्रभावित हुई है । अगर राज्यों की बात करे तो महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर है। जबकि पहले नंबर पर उत्तरप्रदेश दूसरे पर बिहार , उत्तरप्रदेश की 99.8 फीसदी आबादी और बिहार की 98 फीसदी आबादी पीएम 2.5 से प्रभावित है।




वातावरण फाउंडेशन के संस्थापक केशव भट्ट ने बताया की महाराष्ट्र में कई नई परियोजनाओं का कार्य चल रहा है समृद्धि महामार्ग , एयरपोर्ट , और नई नई इमारतों का कार्य चल रहा है इसके चलते प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। पीएम 2.5 प्रदूषक कण को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार कोयला , कार इंजन , गैस अधिक इस्तेमाल हो रहा है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने राज्य के 24 शहरो को प्रदूषित बताया है , जिनमे पनवेल , तलोजा , उल्हासनगर, मुंबई , बदलापुर आदि शहर शामिल है।प्रदूषण बढ़ने के कारगर कारकों को नियंत्रित और मॉनिटरिंग करने में सरकारी एजेंसियां असफल रही है ।

इसे नियंत्रित करने के लिए औद्योगिक कंपनियों सरकार और समाज को एक साथ आना होगा ।



सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचते है कण


पीएम 2.5 धुएं से ज्यादा बढ़ता है। हवा में 2.5 माइक्रोमीटर छोटे होते है ये कण , धूल मिट्टी और धुएं के साथ हवा में मिक्स होकर हमारे फेफड़ों तक पहुंच जाते है, सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जो सांस के मरीज है जैसे अस्थमा और सांस के मरीज है , इससे कैंसर भी होने की प्रबल संभावना रहती हैं।