Wednesday, 25 May 2022

पोस्ट रिपोर्ट्स

न्यूज़ पेपर / मैगज़ीन / पब्लिशर

152 साल पुराने राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, फिलहाल नहीं होगी नई FIR

152 साल पुराने राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, फिलहाल नहीं होगी नई FIR

SOURCE BY : POST REPORTS

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजद्रोह कानून (Sedition Law) पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अब कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी.


देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने 1870 में बने यानी 152 साल पुराने राजद्रोह कानून (Sedition Law) पर फिलहाल रोक लगा दी है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अब कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. अदालत (Supreme Court) ने कहा कि राजद्रोह कानून की समीक्षा होने तक सरकारें धारा 124A में कोई केस दर्ज न करें और न ही इसमें कोई जांच करें. राजद्रोह कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर अब अगली सुनवाई जुलाई में होगी. इससे पहले केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (SG Tushar Mehta) नेप्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की एक पीठ के सामने अदालत में सरकार का पक्ष रखा.


उन्होंने बताया कि राजद्रोह के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करना बंद नहीं किया जा सकता. उन्होंने इसका कारण भी बताया. उन्होंने कहा कि यह प्रावधान एक संज्ञेय अपराध से संबंधित है और 1962 में एक संविधान पीठ ने इसे बरकरार रखा था. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बुधवार को कहा कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) रैंक के अधिकारी को राजद्रोह के आरोप में दर्ज प्राथमिकियों की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है. केंद्र ने राजद्रोह के लंबित मामलों के संबंध में न्यायालय को सुझाव दिया कि इस प्रकार के मामलों में जमानत याचिकाओं पर शीघ्रता से सुनवाई की जा सकती है, क्योंकि सरकार हर मामले की गंभीरता से अवगत नहीं हैं और ये आतंकवाद, धन शोधन जैसे पहलुओं से जुड़े हो सकते हैं. आइए एक नजर डालते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 5 बड़ी बातों पर-


• अब देशद्रोह कानून के तहत कोई मुकदमा दर्ज नहीं होगा.


• जो मामले लंबित है उन्हे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए. यानी कोई सजा नही होगी.


• ये आदेश तब तक लागू होगा जब तक सुप्रीम कोर्ट कोई अगला आदेश न दे.


• केंद्र सरकार ने कहा की वो जुलाई से पहले इस कानून को लेकर कोई फैसला नहीं ले पाएगी.


• जो लोग पहले से राजद्रोह कानून के तहत जेल में बंद हैं, वो राहत के लिए कोर्ट का रुख कर सकेंगे.