Sunday, 23 January 2022

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बक्सवाहा जंगल को बचाने के लिए अब जनआंदोलन की जरूरत है - वीवंडर फाउंडेशन

बक्सवाहा जंगल को बचाने के लिए अब जनआंदोलन की जरूरत है - वीवंडर फाउंडेशन

SOURCE BY : POST REPORTS

विकास की इस दौर में दिन पर दिन जंगल को उजाड़ा जा रहा है एवं अनेकों पेड़ों की हत्या की जा रही है।इसी कड़ी में हीरा के लिए बक्सवाहा जंगल के लाखों पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है।मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के छतरपुर जिले का बक्सवाहा आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा इसलिए है की हीरे की खदान को लेकर बक्सवाहा के जंगल में लगे लाखों पेड़ों को काटने की तैयारी चल रही है।सरकारी आंकड़े के अनुसार 2 लाख 15 हजार से अधिक पेड़ काटे जाएंगे।एसेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड बिरला ग्रुप की डायमंड परियोजना में प्रतिदिन एक करोड़ 60 लाख 50 हजार लीटर पानी की प्रतिदिन खपत होगी सूखे की समस्या से ग्रस्त क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट के द्वारा भूमिगत जल को भी निकाला जाएगा अब स्थिति कितनी भयानक हो सकती है इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।बक्सवाहा विकासखंड में 40 ग्राम पंचायत हैं।


131 राजस्व गांव जहां पर ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 90277 एवं शहरी क्षेत्र की संख्या जनसंख्या 10216 है।बुंदेलखंड में सूझे की समस्या लोगो  को परेशान करता रहता है, इसी वजह से यहां पर पलायन भी अधिक होता है।कभी बुंदेलखंड जल, जंगल के मामले में समृद्ध हुआ करता था  वक्त की मार ने इस इलाके को हरियाली को तो कोई ग्रहण लगाया ही जल स्त्रोतों को भी दफन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी यह सिलसिला निरंतर जारी है और अब जो इस इलाके का जो भी हिस्सा  हरा भरा बचा है, उसे भी तबाह करने की पटकथा लिखी जा रही है।इस जंगल मे लाखो खूबसूरत पेड़ के साथ जानवर, पक्षी, गौरैया, तोता सब है। नदी है, तालाब है।



इसे खत्म होते ही एक असंतुलन पैदा होगा। प्रदूषण बढ़ेगा। पक्षी , जानवर इधर उधर भागेंगे और मरेंगे। बारिश नही होगी। ग्राउंड वाटर खत्म हो जाएगा। एक भयानक आपदा के भागी होंगे हम। ऑक्सीजन की कमी के कारण दिक्कत क्या होता है, ये हम सबने पिछले कुछ महीनों में  देखा है। फिर आएगी भयानक आपदा। कुछ नही बचेगा।बक्सवाहा के जंगल में हीरे के खनन का काम एक निजी कंपनी के हाथों में सौंपी जाने के खिलाफ पर्यावरण प्रेमियों में गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। विरोध तेज हो रहा है तो मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है।अब देखने वाली बात यह होगी कि जंगल की बात सुनी जाएगी या फिर हीरे की चाहत वालों की या जीवन देने वाले पेड़ जंगल को बचाने में लगे पर्यावरण पर रक्षकों की क्योंकि प्रकृति की बात हम अनदेखी कर रहे हैं।


बक्सवाहा जंगल को बचाने के सवाल के साथ-साथ वहां की संस्कृति जीवन इतिहास को भी बचाने की आवाज लगातार देश पूरे देश में बढ़ रही है उठ रही है। इसी के अंतर्गत वाराणसी की सामाजिक संस्था वीवंडर फाउंडेशन की टीम ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से एक पत्र के माध्यम से इस जंगल को बचाने के लिए विनम्र निवेदन किया है।*
विष्णु पुराण में बताया गया है कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावडियो के बराबर एक तालाब,10 तालाबों के बराबर एक पुत्र और 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। इस बात से हम सहज आकलन कर सकते हैं कि वृक्षों का हमारे जीवन में कितना महत्व है। तो आइए आज हम सभी मिलकर यह प्रण ले कि बकस्वाहा के वृक्षों को काटने से रोकने के लिए एक प्रयास करें।

गोपाल कुमार
अध्यक्ष 
वीवंडर फाउंडेशन,वाराणसी