Saturday, 31 July 2021

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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर घमासान: संयुक्त विपक्ष की कमान थामी कांग्रेस की उर्मिला सोनकर ने भाजपा पहले ही खोल चुकी है अपने पत्ते, पूर्व सांसद अनुरागी पर खेला दांव

जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर घमासान:   संयुक्त विपक्ष की कमान थामी कांग्रेस की उर्मिला सोनकर ने  भाजपा पहले ही खोल चुकी है अपने पत्ते, पूर्व सांसद अनुरागी पर खेला दांव

SOURCE BY : POST REPORTS

Bureau Chief Vishnu Chansoliya Reports

Postreports Desk Team



जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर घमासान:



संयुक्त विपक्ष की कमान थामी कांग्रेस की उर्मिला सोनकर ने


भाजपा पहले ही खोल चुकी है अपने पत्ते, पूर्व सांसद अनुरागी पर खेला दांव



उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर प्रत्याशिता को लेकर फिलहाल भाजपा में छाई कुहासे की परत पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के नाम की घोषणा होते ही छंट गया है लेकिन विपक्ष के प्रत्याशी को लेकर अभी भी राजनैतिक क्षितिज पर धुंध छाई हुई है।


हालांकि शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर इसके लिए हलचल तेज हो गई और लोगों के जेहन में कुलबुला रहे सवाल कि विपक्ष अपना कोई संयुक्त प्रत्याशी उतारेगा भी या सत्ता दल को अपना अध्यक्ष बनाने के लिए वॉकओवर देता है, पर से भी परदेदारी लगभग हट चुकी है। महज एक सीट जीतने बाली कांग्रेस की उर्मिला सोनकर खाबरी ने संयुक्त विपक्ष की कमान थामने का ऐलान करके जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।



राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव कराने की घोषणा के बाद राजनीतिबाजों का पूरा फोकस इस चुनाव पर आकर टिक गया है। एक तरफ सत्ताधारी भाजपा के लिए यह चुनाव नाक का सवाल बना हुआ है तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने संयुक्त विपक्ष की कमान थाम कर भाजपा खेमे में बेचैनी बढा दी है। किसी भी दल के पास जादुई आंकड़ा नहीं होने की स्थिति में यह चुनाव काफी पेचीदगियां अपने में समेट कर चल रहा है और राजनीति के माहिर लोग जोड़तोड़ करने में लगे हैं।


दलीय लिहाज से अगर देखा जाए तो कोई भी दल मैजिक नंबर तेरह के आसपास भी नहीं फटक रहा है, ऐसे में जोड़तोड़ के सहारे ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की कवायद चल रही है और अंदरखाते वोटों को लेकर मोलतोल का बाजार गर्मी पकड़े हुए है। दिलचस्प यह है कि सत्ता में रहते हुए भी भाजपा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था और उसके पास पच्चीस में सिर्फ छह सीटें ही हैं जबकि बसपा के पास सबसे ज्यादा सात और सपा के पास चार सीटें हैं। और तो और, कांग्रेस के ताबे में भी एक सीट है। 


इस तरह की अस्पष्ट स्थितियों में सीना चौड़ा कर यह कह पाने की स्थिति में भाजपा के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी सामने आए हैं कि उन्होंने अध्यक्ष बनने के लिए जरूरी नंबर्स का जुगाड़ कर लिया है। उनके इस दावे की रोशनी में ही भाजपा हाईकमान ने उनके नाम पर मोहर लगाते हुए उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित किया है। अनुरागी के इस भरोसे के बाद पार्टी आलाकमान मान कर चल रहा है कि उसके पास जीत के लिए आठ अतिरिक्त मतों की व्यवस्था हो चुकी है।


बैसे भी सत्ताधारी भाजपा के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद अपने ताबे में करना प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। पार्टी के जिले से लेकर प्रदेश तक के अलंबरदार इस मैजिक नंबर को हासिल करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाने में जुटे हैं और जिन तथाकथित आठ अतिरिक्त मतों का अपने पाले में होने का दावा भाजपा प्रत्याशी ने किया है उनकी निगरानी में किसी भी तरह की चूक नहीं होने देना चाहेंगे वरना भाजपा का बना बनाया खेल बिगाड़ सकता है। 


इस पूरे घमासान के बीच संयुक्त विपक्ष को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि विरोधी दल खासतौर पर भाजपा से छत्तीस का आंकड़ा रखने बाले सपा बसपा जैसे दल चुप नहीं बैठेंगे। अगर भाजपा को जिपं अध्यक्ष पद से दूर रखने पर आमादा विपक्ष में एकजुट होकर सर्वमान्य प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनती है तो भाजपा की राह में मुश्किलें खड़ी होते देर नहीं लगेगी। हालांकि कांग्रेस की उर्मिला सोनकर खाबरी के सामने आने और शनिवार को नामांकन करने के उनके ऐलान ने भाजपा खेमे में बेचैनी बढा दी है। उर्मिला बरिष्ठ पूर्व पीसीएस अधिकारी होने के साथ साथ पूर्व सांसद बरिष्ठ कांग्रेसी नेता ब्रजलाल खाबरी की पत्नी हैं।


जैसा कि सूत्र बता रहे हैं, जोड़तोड़ की राजनीति के पुराने खिलाड़ी ब्रजलाल साम दाम दंड भेद की राजनीति कर अपनी पत्नी के लिए जिला पंचायत पहुंचने का रास्ता बनाने में जुटे भी हैं। अब यह देखना बाकई काफी दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है क्योंकि एक तरफ भाजपा अपने पास मैजिक नंबर होने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ उर्मिला के नामांकन की घोषणा को भी हल्के में नहीं आंका जा सकता है। यहां इस बात को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है कि सत्ताधारी भाजपा की हर मुमकिन कोशिश अपने प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित कराने की होगी।


ऐसे में भाजपा अपने तरकश के सभी तीर आजमाने में बिल्कुल भी गुरेज नहीं करेगी। ऐसे में बहुत संभव है कि भाजपा विपक्षी प्रत्याशी को नामांकन करने से रोकने के लिए सत्तदल की धौंस का इस्तेमाल कर सकती है। ऐसी आशंका शुक्रवार को उर्मिला सोनकर द्वारा प्रेस वार्ता के दौरान जताई भी गई है।