Friday, 14 May 2021

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जिला पंचायत के बाबुओ की मिलीभगत से शासन को लग रहा राजस्व का पलीता

जिला पंचायत के बाबुओ की मिलीभगत से शासन को लग रहा राजस्व का पलीता

SOURCE BY : POST REPORTS

Bureau Chief Vishnu Chansoliya Reports

Postreports Desk Team



बरामदा को दुकान में मिलाकर मिटा दिया नामोनिशान


0 गाँधी मार्किट में वाहनों की बजह पैदल चलना भी हुआ दुस्वार   


उरई। बैसे तो नगर क्षेत्र के मुख्य बाजार की सडकें काफी समय से अतिक्रमण की बजह से धीरे-धीरे सिकुड़ती जा रही है। और जिला प्रशासन और पालिका द्वारा मुख्य बाजार में अभियान चलाकर समय-समय पर अतिक्रमण से निजात दिलाने के लिए प्रयास भी किया जाता है। लेकिन जिला पंचायत के अधीन निर्मित गाँधी मार्केट में खुद बाबुओ की मिली भगत से दुकानदारो को अतिक्रमण करने की मौखिक स्वीकृति देकर राहगीरों के चलने के लिए बने बरामदा को दुकानदारो के अधीन करके उसका नमो निशान ही मिटवा दिया गया। जिसकी बजह से एक तरफ दुकानों का क्षेत्रफल बढ़ जाने से शासन को किराये के रूप में आर्थिक क्षति हो रही है। वही दूसरी तरफ पैदल चलने बाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


गौरतलब है कि शहर में जिला पंचायत द्वारा लगभग 80-85 के दशक में गाँधी मार्केट का निर्माण किया गया था। जिसमे लोगो को अपना व्यापार करने के लिए नीलामी के माध्यम से दुकानों का आवंटन किया गया था। जिला परिषद् द्वारा पैदल राहगीरों को समान की खरीद फरोक्त करने के उद्देश्य से सभी दुकानों के वाहर बरामदा का निर्माण कराया गया था। जिसका उद्देश्य था कि रास्ते में खड़े वाहनों की बजह से लोगो को निकालने में परेशानी न हो साथ ही दुकानदारो को धूप और वारिस के समय पानी की समस्या से न जूझना पड़े। बाबजूद इसके गाँधी मार्केट में ज्यादातर दुकानदारो ने जिला पंचायत के बाबुओ की मिली भगत से दुकानों के वाहर बने बरामदा को अपनी दुकानों में मिलाकर वाहर ही दुकानों की शटर लगवा दुकानों का क्षेत्रफल बढ़ा लिया। इतना ही नहीं गाँधी मार्केट में दिनभर दुकानों का समान लेकर आने बलि डीसीएम, लोडर से लेकर कई अन्य वाहनों का आवागमन लगा रहता है। और मार्केट में आने बाले वाहन काफी समय तक दुकानों के समाने खड़े रहते है। जिसकी बजह से न तो दो पहिया वाहन चालक आसानी पूर्वक निकल पाते है और न ही मार्केट में समान की खरीद करने बाला पैदल व्यक्ति ही सुरक्षित चल पाता।


आपको बता दे कि दुकानों की जगह के हिसाब से लोगो को दुकानों का आवंटन किया गया था और जगह के हिसाव से ही जिला परिषद् द्वारा पूर्व से निर्धारित किराया लिया जाता है। लेकिन जिस प्रकार से दुकानों में बरामदा मिलाकर दुकानों का क्षेत्रफल बड़ा करके बरामदा का नामोनिशान मिटा दिया गया। उस क्षेत्रफल के अनुसार किराया न लिए जाने से शासन को राजस्व का पलीता लगा रहा है। जो कही न कही जिला पंचायत के बाबुओ की तरफ मिली भगत की तरफ इशारा करता है।  


इनसेट


अधिकारी ने निर्माणाधीन दुकान का रुकवाया काम


उरई। जिला पंचायत के अधीन नगर में बनी गाँधी मार्केट में आनंद स्पोर्ट के नाम एक दुकान आवंटित है। वताया जाता है कि दुकानदार ने पूर्व में ही बरामदा को दुकान में मिलाकर दुकान का क्षेत्रफल काफी अधिक कर लिया। फिर भी दुकानदार के मन को तसल्ली नहीं मिली और एक दुकान को दो दुकानों में तब्दील करने का लालच मन में आने पर जिला पंचायत से बगैर परमिशन के ही निर्माण कार्य कराना शुरू कर दिया।


जिसकी जानकारी जब जिला पंचायत के अधिकारियो को हुयी तो उन्होंने मौके पर कर अधिकारी सहित अन्य टीम को भेज दिया। लेकिन जब टीम ने निर्माण कार्य का मौका मुआयना किया तो दुकानदार की बोलती बंद हो गयी। तभी टीम ने दो दुकानों का सपना सजोकर किये जा रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया।