Saturday, 17 April 2021

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91 साल की हुई लता मंगेशकर जी , जाने अब तक का सफर

91 साल की हुई लता मंगेशकर जी , जाने अब तक का सफर

SOURCE BY : POST REPORTS

संगीत की दुनिया को छोड़ भी दें तो लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) ने जिन संघर्षों से गुजर कर यह राह बनाई वह किसी भी गिरने वाले के लिए दोबारा उठ कर खड़े होने के लिए ताकत भर देता है. आज के दौर में नारीवाद का झंडा जिस तरह से बुलंद किया जा रहा है, जब वह राह भटक जाए तो भारत में क्रांतिकारी दुर्गा भाभी, तैराक आरती साहा, कल्पना चावला और ऐसे कई नामों को देखकर दिशा पा सकता है. कहना गलत नहीं होगा, इन नामों एक नाम लता मंगेशकर भी हैं. 

खास बातें

    • 28 सितंबर 1929 को जन्मीं लता मंगेशकर
    • पिता की मृत्यु के बाद उठाई परिवार की जिम्मेदारी, और शुरू हो गया फिल्मी सफर

नई दिल्लीः भारत रत्न लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) आज 91वां जन्मदिवस मना रही हैं. फिल्म इंडस्ट्री में 75 साल से अधिक समय से सक्रिय, 36 भाषाओं में 50 हजार से भी अधिक गीत गाते हुए लता ने जो मुकाम हासिल कर लिया है. भारतीय पार्श्व गायन में कोई इसके करीब भी नहीं पहुंच पाता है. उनके रिकॉर्ड ही ऐसे -ऐसे हैं कि फिल्मी दुनिया के कई काल के गायक-गायिका इससे पार नहीं पा सकते. 

उनके चढ़ाव-उतराव, फिल्मी सफर और उनकी विदेश यात्राओं के अनुभव को संजोया, और काफी बाद में इसे किताब की शक्ल दी. लता दीदी, अजीब दास्तां है ये नाम से यह किताब भिमानी के शब्दों के जरिये लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) को जानने-समझने का बेहद खूबसूरत जरिया है

 

पिता के शिष्य को सिखाया था सही सुर
एक बार लता (lata Mangeshkar) के पिता के शिष्य चंद्रकांत गोखले रियाज कर रहे थे. दीनानाथ किसी काम से बाहर निकल गए. पांच साल की लता वहीं खेल रही थीं. पिता के जाते ही लता अंदर गई और गोखले से कहने लगीं कि वो गलत गा रहे हैं. इसके बाद लता ने गोखले को सही तरीके से गाकर सुनाया.

पिता जब लौटे तो उन्होंने लता से फिर गाने को कहा. लता ने गाया और वहां से भाग गईं. लता (lata Mangeshkar) मानती हैं 'पिता का गायन सुन-सुनकर ही मैंने सीखा था, लेकिन मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनके साथ गा सकूं. 

जब मिला पहला ब्रेक
संगीतकार गुलाम हैदर ने 18 साल की लता को जब सुना तो फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी से मिलवाया. शशधर मुखर्जी तब चोटी के फिल्मनिर्मता थे. शशधर ने साफ कह दिया ये आवाज बहुत पतली है, नहीं चलेगी'. फिर मास्टर गुलाम हैदर ने ही लता (lata Mangeshkar) को फिल्म 'मजबूर' के गीत 'अंग्रेजी छोरा चला गया' में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया.

यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था, इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई. बाद में शशधर ने अपनी गलती मानी और 'अनारकली', 'जिद्दी' जैसी फिल्मों में लता से कई गाने गवाए.

मोहम्मद रफी से विवाद?
लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) ने बचपरन से ही अपनी शर्तों पर जीना सीख लिया था. इसकी झलक उनके जीवन में भी मिलती रही. सबसे बड़ा किस्सा मोहम्मद रफी को लेकर हुए विवाद का था. लता मंगेशकर ने प्रस्ताव रखा था कि म्यूज़िक कंपनियों को रेकॉर्ड बिक्री में से कुछ पैसा गायकों देना चाहिए. रॉयल्टी के इस मुद्दे पर रफी उनसे अलग राय रखते थे.

इसके विवाद की वजह से दोनों लंबे समय तक साथ गाना नहीं गाया. हालांकि, साल 1967 में दोनों के रिश्ते सामान्य हो गए. 

लता की गोद में ऋषि कपूर
अभी अभिनेता ऋषि कपूर को गुजरे कुछ महीने ही हुए हैं. लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) इस मौके पर काफी दुखी हो गईं थी. उन्होंने ऋषि दा की कई फिल्मों के लिए गाने गाए हैं. उनकी मृत्यु पर शोक जताते हुए लता मंगेशकर ने एक फोटो इंस्टाग्राम पर अपलोड की थी, जिसमें ऋषि कपूर उनकी गोद में हैं.

इस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा 'कुछ समय पहले ऋषि जी ने मुझे अपनी और मेरी तस्वीर भेजी थी. वो सब दिन, सब बातें याद आ रही हैं. मैं शब्दहीन हो गई हूं.'' लता (lata Mangeshkar) ने दूसरे ट्वीट में लिखा है, ''क्या कहूं, क्या लिखूं, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है. ऋषि जी के निधन से मुझे बहुत दुख हो रहा है. उनके जाने से फ़िल्म इंडस्ट्री को बहुत हानि हुई है. यह दुख सहना मेरे लिए बहुत मुश्किल है. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे.'

जब बड़े गुलाम अली खां भूल गए गाना
बड़े गुलाम अली खां एक वक्त चोटी के ठुमरी गायक थे. लता मंगेशकर के लिए बेहद सम्मानित. एक बार मुंबई के किसी कन्सर्ट में वे गाने गए थे. वहां शो से पहले सभी लोग रियाज कर रहे थे कि पास ही कहीं रेडियो पर गाना बजने लगा 'जा रे बदरा बैरी जा रे जा रे.' लता ही इसे गा रही थीं.

खां साहब उनके गाने में ऐसा मगन हुए कि वह भूल ही गए उन्हें क्या गाना था. उन कन्सर्ट की शुरुआत खां साहब राग यमन से करने वाले थे. लेकिन भूल जाने के कारण उन्होंने कुछ और ही गाया. लता के लिए वह कहते थे कि कभी बेसुरी नहीं होती,

वहीं लता कहती हैं कि अगर वह ठीक से रियाज करतीं तो उनके जैसा गा पातीं. उनकी पुण्य तिथि पर लता ने उन्हें याद किया था.