Monday, 03 October 2022

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ब्रेन बोन निकालकर दोबारा लगाया .....22 साल की युवती को मिला जीवनदान ।

ब्रेन बोन निकालकर  दोबारा लगाया .....22 साल की युवती को मिला जीवनदान ।

SOURCE BY : POST REPORTS

ब्रेन बोन निकालकर दोबारा लगाया .....22 साल की युवती को मिला जीवनदान ।

Mumbai : 22 साल की अर्चना को सिर में दर्द हो रहा था उनको चक्कर आ रहा था उस समस्या के लिए अस्थाई रूप से दवा शुरू कर दी गई हाला हाला की डांस करते हुए अर्चना एक बार बेहोश हो गई जब उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया तो पता चला कि उसे ब्रेन ट्यूमर है इस गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद उनके मस्तिष्क की हड्डी को हटाकर कुछ समय के लिए फिर से प्रत्यारोपित कर दिया गया करीब 1 महीने के वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद अब वह फिर से सामान्य जिंदगी जी रही हैं तो उन्होंने फिर से डांस की प्रैक्टिस शुरू कर दी है.



अर्चना को उनके मस्तिष्क के मध्य भाग में 15 सेंटीमीटर के ब्रेन ट्यूमर के लिए क्रैनियोटॉमी के बाद जीवनदान दिया गया गंभीर सिर दर्द और उल्टी के अलावा दृश्य का धुंधलापन का अनुभव किया गया था चलने में भी परेशानी होती थी ट्यूमर की जटिल स्थिति के कारण स्थानीय अस्पतालों ने कोई भी सर्जरी करने से इंकार कर दिया फिर उन्हें सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया इस बारे में अस्पताल के मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ विवेक अग्रवाल ने कहा कि उनकी सर्जरी और जटिल हो गई थी।


 क्योंकि बहुत अधिक खून की कमी हो गई थी क्योंकि ट्यूमर को अधिक रक्त की आपूर्ति हो रही थी उनका दिमाग सूज गया था खून बह रहा था इसलिए वह रास्ता था जिससे कम समय में सर्जरी हो सके मस्तिष्क दबाव कम करने और संरक्षित करने के लिए उसकी खोपड़ी को 1 महीने के लिए रेफ्रिजरेटर में रखा गया था । 1 महीने के वेंटिलेटर और रक्त आदान के बाद वह एक तरफ लकवा के साथ ठीक हो गई। उसकी कमजोरी में धीरे-धीरे सुधार हुआ और वह सुधरने लगी जिसके बाद हड्डी को उसकी खोपड़ी में फिर से डाल दिया गया.


क्रैनियोटॉमी क्या है


सिर की हड्डी का एक टुकड़ा मस्तिष्क के उस हिस्से से हटा दिया जाता है जहां ऑपरेशन किया जाना है लेकिन यह कभी-कभी कुछ जटिलताओं का कारण बन सकता है क्योंकि मस्तिष्क बहुत संवेदनशील क्षेत्र है इसलिए इतना बड़ा जोखिम उठाना बहुत खतरनाक हो सकता है हाल के वर्षों में घातक ब्रेन ट्यूमर को की होल न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी द्वारा हटाया जा सकता है यह ब्रेन केशिया खोपड़ी को चोट पहुंचाए बिना पिट्यूटरी ग्रंथि या अन्य क्षेत्रों को खतरे में डाले बिना किया जाता है।