Wednesday, 25 May 2022

पोस्ट रिपोर्ट्स

न्यूज़ पेपर / मैगज़ीन / पब्लिशर

नवजोत सिंह सिद्धू को बड़ा झटका, 34साल पुराने केस में SC ने सुनाई एक साल कैद की सज़ा

नवजोत सिंह सिद्धू को बड़ा झटका, 34साल पुराने  केस में SC ने सुनाई एक साल कैद की सज़ा

SOURCE BY : POST REPORTS

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 15 मई, 2018 के एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा को बदल दिया है. जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने ये फैसला सुनाया है.


34 साल पुराने रोड रेज केस में कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू ( Navjot Singh Sidhu) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ा झटका लगा है. उन्हें एक साल जेल की सजा हुई है. उन्हें एक साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने अपने 15 मई, 2018 के एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा को बदल दिया है. जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने ये फैसला सुनाया है.


इसी साल 25 मार्च सुप्रीम कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू की सजा बढ़ाने की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था. सभी पक्षों की दलीलें सुनने को बाद फैसला सुरक्षित रखा था. सुप्रीम कोर्ट को तय करना था कि सिद्धू की सजा बढ़ाई जाए या नहीं. पीड़ित परिवार की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा गया था. इससे पहले पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें बढ़ गईं थीं.


सुप्रीम कोर्ट ने साधारण चोट की बजाए गंभीर अपराध की सजा देने की याचिका पर सिद्धू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. पीड़ित परिवार ने याचिका दाखिल कर रोड रेज केस में साधारण चोट नहीं बल्कि गंभीर अपराध के तहत सजा बढ़ाने की मांग की. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साधारण चोट का मामला बताते हुए सिर्फ ये तय करने का फैसला किया था कि क्या सिद्धू को जेल की सजा सुनाई जाए या नहीं. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विशेष पीठ में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजय किशन कौल के सामने पीड़ित परिवार यानी याचिकाकर्ता की ओर से सिद्धार्थ लूथरा ने कई पुराने मामलों में आए फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सड़क पर हुई हत्या और उसकी वजह पर कोई विवाद नहीं है.


पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी साफ है कि हत्या में हमले की वजह से चोट आई थी, हार्ट अटैक नहीं, लिहाजा दोषी को दी गई सजा को और बढ़ाया जाए. सिद्धू की ओर से पी चिदंबरम ने याचिकाकर्ता की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने मामले को अलग दिशा दी है. ये मामला तो आईपीसी की धारा 323 के तहत आता है. घटना 1998 की है. कोर्ट इसमें दोषी को मामूली चोट पहुंचाने के जुर्म में एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना चुका है.